Thursday, April 28, 2011

जिस अंग पर हमारा पूरा शरीर चलता है वह है हमारा दिल। दिल से ही सभी अंगों में रक्त का संचार होता है। दिल के संबंध में छोटी सी असावधानी बड़ी बीमारी को न्यौता दे सकती है। इसलिए इसका ध्यान रखना अति आवश्यक है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए योगासन की मदद अवश्य लें। इसके लिए हमें शशकासन करना चाहिए इस आसन की पूर्ण अवस्था में हमारी आकृति शशाक अर्थात् खरगोश के समान हो जाता है, इसलिए इसे शशकासन कहते हैं।

शशकासन की विधि
- किसी साफ जगह पर चटाई बिछाकर बैठ जाएं। दोनो पैरों को घुटनों से मोड़कर पीछे की ओर नितम्ब (हिप्स) के नीचे रखें और एडिय़ों पर बैठ जाएं। अब सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर करें। इसके बाद सांस को बाहर छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुकते हुए सांस को बाहर निकालें। दोनो हाथों को आगे की ओर फैलाते हुए हथेलियों को जमीन पर टिकाएं। अपने सिर को भी जमीन पर टिकाकर रखें। आसन की इस स्थिति में आने के बाद कुछ समय तक सांस को बाहर छोड़कर और रोककर रखें। फिर सांस लेते हुए शरीर में लचक लाते हुए पहले पेट को, फिर सीने को, फिर सिर को उठाकर सिर व हाथों को सामने की तरफ करके रखें। कुछ समय तक इस स्थिति में रहे और फिर सीधे होकर कुछ समय तक आराम करें और इस आसन को 4-5 बार करें।

शशकासन के लाभ
- यह आसन हृदयरोगियों के लिए काफी फायदेमंद है। इस आसन से फेफड़ों में स्वच्छ हवा पहुंचने से फेफड़े स्वस्थ बन जाते हैं। इससे आंते, यकृत आदि भी स्वस्थ होते हैं। इस आसन से नसें-नाडिय़ां स्वस्थ व लचीली होकर सुचारू रूप से कार्य करती है। साइटिका में लाभदायक है। यह आसन कब्ज को दूर करता है तथा सामान्य रूप से कामविकारों को दूर करता है। यह आसन महिलाओं के लिए भी लाभकारी है।जिस अंग पर हमारा पूरा शरीर चलता है वह है हमारा दिल। दिल से ही सभी अंगों में रक्त का संचार होता है।दिल के संबंध में छोटी सी असावधानी बड़ी बीमारी को न्यौता दे सकती है। इसलिए इसका ध्यान रखना अतिआवश्यक है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए योगासन की मदद अवश्य लें। इसके लिए हमें शशकासन करना चाहिए इस आसन की पूर्ण अवस्था में हमारी आकृति शशाक अर्थात् खरगोश के समान हो जाता है, इसलिए इसे शशकासन कहते हैं।

प्रकाश, उजाला और निखार हमेशा से ही तारीफ की नजरों से देखे जाते हैं। अक्सर कुछ लोग अपने सांवले रंग से परेशान रहते हैं। सांवला रंग कभी किसी के करियर में रुकावट बनता है तो कभी शादी ब्याह में। ज्यादातर लड़के लड़कियां भी अपने लिए गोरे रंग के हमसफर को प्रीफर करते है। अगर आप अपने सांवले रंग से परेशान हैं तो घबराइये नहीं कुछ आसान आयुर्वेद नुस्खे ऐसे हैं जिनसे आपका सांवलापन दूर हो सकता है।

1. एक बाल्टी ठण्डे या गुनगुने पानी में दो नींबू का रस मिलाकर गर्मियों में कुछ महीने तक नहाने से त्वचा का रंग निखरने

लगता है (इस विधि को करने से त्वचा से सम्बन्धी कई रोग ठीक हो जाते हैं)।

2. आंवला का मुरब्बा रोज एक नग खाने से दो तीन महीने में ही रंग निखरने लगते है।

3. गाजर का रस आधा गिलास खाली पेट सुबह शाम लेने से एक महीने में रंग निखरने लगता है। रोजाना सुबह शाम खाना खाने के बाद थोड़ी मात्रा में सांफ खाने से खून साफ होने लगता है और त्वचा की रंगत बदलने लगती है। आपकी राय

4. प्रतिदिन खाने के बाद सोंफ का सेवन करें।

5. रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ नियमित रूप से त्रिफला चूर्ण का सेवन करें।
आजकल अच्छा खान-पान न होने की वजह से याददाश्त का कमजोर होना एक आम समस्या बन गई है।हर आदमी अपनी भूलने की आदत से परेशान है, लेकिन अब आपको परेशान हो की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आयुर्वेद में इस बीमारी को दूर करने के सरलतम उपाय बताए हैं।

1. सात दाने बादाम के रात को भिगोकर सुबह छिलका उतार कर बारीक पीस लें । इस पेस्ट को करीब 250 ग्राम दूध में डालकर तीन उबाल लगाऐं। इसके बाद इसे नीचे उतार कर एक चम्मच घी और दो चम्मच शक्कर मिलाकर ठंडाकर पीऐं। 15 से 20 दिन तक इस विधि को करने से याददाश्त तेज होती है।

2. भीगे हुए बादाम को काली मिर्च के साथ पीस लें या ऐसे ही खूब चबाचबाकर खाऐं और ऊपर से गुनगुना दूध पी लें।

3. एक चाय का चम्मच शंखपुष्पी का चूर्ण दूध या मिश्री के साथ रोजाना तीन से चार हफ्ते तक लें ।

विशेष: सिर का दर्द, आंखों की कमजोरी, आंखों से पानी आना, आंखों में दर्द होने जैसे कई रोगों में यह विधि लाभदायक है।
सभी जानते हैं कि अच्छी सेहत में फलों की बेहद अहम् भूमिका होती है। रोज फल खाएं और स्वस्थ रहें, अब यह कोई कहावत नहीं है, आधुनिक मेडीकल सांइस भी यह स्वीकार करता है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिये हर व्यक्ति को प्रतिदिन कोई न कोई फल जो कि प्राकृतिक रूप से पका हुआ हो, अपनी डेली डाइट में अवश्य शामिल करना चाहिये।
वैसे तो सारे ही फल अच्छे स्वास्थ्य के लिहाज से काफी फायदेमंद होते हैं, पर इनमें भी कुछ फल तो विशेष रूप से मनुष्य के लिये अमृत और वरदान के समान गुणगाकारी होते हैं। यहां हम ऐसे ही सेहत के लिहाज से अमूल्य फल का जिक्र कर रहे हैं, जिसे- बेल फल के नाम से जाना जाता है। भगवान शंकर को चढऩे वाले बेलपत्र इसी वृक्ष के पत्ते होते हैं। यह बेल वृक्ष के नाम से जाना जाता है और अधिकांशत: शिव मंदिरों या शिवालयों के समीप पाया जाता है।
बेल फल गर्मियों के दिनों में ही पकता है। इसके गुणों लोग बहुत ज्यादा परिचित नहीं हैं, साथ ही इसका स्वाद भी सभी को पसंद नहीं आता है। बाजार में बेलफल का मुरब्बा अवश्य आसानी से मिल सकता है। लेकिन मुरब्बा उतना गुणकारी नहीं होता जितना कि पेड़ पर पका हुआ बेलफल।

पेट के तमाम रोगों में तो यह बेलफल रामबाण औषधि का काम करता है। गैस, कब्जियत, जलन, खट्टी डकारें, बदहजमी, भूख न लगना जैसे रोगों का तो जैसे यह काल ही होता है। पेट की बीमारियों में जहां ज्यादातर दवाइयां थोडे समय का असर दिखाकर निष्क्रिय हो जाती हैं, वहीं यह बेलफल एक अचूक औषधि के रूप में पेट की तमाम बीमारियों को जड़ से मिटा समाप्त करता है।